Thursday, November 11, 2010

हवा में भांग ,

जो रंग भंवर के लिए समर्पित,

कर रहे हैं "मैं" वापस ,

हवाएं धीरे पीले रंग में.

आत्मा कि हवा के साथ संगत.

मुलायम दूर गति में,

"कलिंग" झुका, अशोक हारा

एक धनुष खुश, गतिशील जैसे कृष्ण.

चाँद की रोशनी में वे काले रंग की पृष्ठभूमि पर चमक रहे हैं.

नीले, नारंगी, पीले, हरे,

रंगीन रोशनी के इन आंदोलनों मे .

"हवा", ने " चित्रकार से कहा -कि अपना नाम रखो"

हर निमित्त . छवियों के निर्माता ?

प्रदर्शनी में विभिन्न नामों मे,

आपना "नाम" रखो

चित्रों की प्रदर्शनी की एक श्रृंखला का अध्ययन .

प्रदर्शन क्रमशः है,

" नृत्य," मेरी आत्मा का स्पर्श ,

" पिछले दिनो आत्मा, खड़ी ,गतिशील ,

चित्रों के बिना मै", "चाँदनी का कांटा" .............के पीर कौन जानता है?

"नाम "शामिल हैं.

चित्रकार आईना,

आपका" नाम" प्रदर्शनी है. प्रकृति, स्वतंत्रता, प्रजनन, मामले मे,

अस्तित्व और गति एक चलती छवि की भाषा,

वर्णित है एक रंगीन भूमि की प्रदर्शनी.

एक कदम से प्रकाश तत्वों की.

प्रकाश, गहराई, छाया, काला, सफेद शेष एक गणितीय समस्या,

कलाकार के लिए इन मानकों को रखना .

प्रतिबद्ध है.सरल रूप में .सरलता मौजूद है.

हर चित्र एक जीवन है.

दिल एक कहानी आँखों के साथ साझा करने के लिए .

हर तालिका कहने के लिए शब्द है.

आप के साथ कुछ शब्द कहने की तरह कहती है आँखें.

रूप

मानव प्रकृति और जीवन के इस तरह के उत्साह में.

में एक जगह" पीले, नीले बैठे. एक समर्पण, एक आत्मसमर्पण सुनाई देता है.-- Raaj

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