Thursday, November 18, 2010

मौत के पेरोकर


मौत के पेरोकर ,
मौत - एक व्यक्ति की या समूह ,
नही जगाती कोई सवेंदना ,
हम सारे सीलन से भरे हैं ,
कोई आग नही...
मरने दो -जो कोई मरता है ,हमें क्या ?
भोपाल गैस रिसाव ने हजारो लोगो को मारा....
लेकिन वह नही ख़त्म कर सकी -रिश्वत ,लालच,चापलूसी....,
अंग्रेज हमें काला कुत्ता कहते थे ,
तभी से भारतीयों मै एक आनुवंशिक बदलाव आ गया..उनकी जीभ लम्बी हो गई .....
गोरे दीखते ही हमारी लार टपकने लगती है ,हाथ मांगने के लिए उठ जाते है,
गोरो के पास हर गले के नाप का पट्टा है ,
वे जानते है भारतीय स्मृतिहिन् ...जल्दी भूल जायेगे ......
इस "महाभारत" के वीर अर्जुन ,मोती,स्वराज ,दिग्विजय ,राजीव ...........धर्त्तराष्ट्र _अहमदी

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