Monday, February 21, 2011

धूम्रपान ...


प्रतिध्वनियों के रूप में ,

मेरे साथ चाँद जाएगा,

उग्र दौर,

दौर

घुमक्कड़,

पहिया ,

दौड़



छंद



हाथ

कीड़े

मसलना पैरो तले,

डामर, प्रकाश, धुन्ध से रहित ,

सड़क

दम



गालियां बाते ,


अस्वीकार



आज

टूटा

तलाश



लालसा, और अनाकार ,

आंकड़ा घिसा -पिटा ,

मेरी बारी है,

बंद


सिगरेट

बारह खम्भा ..जाते हुए

मेरे फेफड़ों मे धुँआ

धूम्रपान ...

एक चाँद के लिए

......................... चलना

चलना
.....

मैं हूँ,

मुझे अफसोस है,

तू मेरी जानिब
मैं अपनी आवाज डाल पर .

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