जब
रूप में प्रत्येक पक्षी पंख है, पक्षी एक आकाश बनाता है.उत्थान के लिए
पूरे झुंड में मानुष खुद को कहते हैं. भीड़
लोग.................. एक आम दिशा
वे और अधिक जल्दी में जा रहे हैं , रेड लाइट नहीं है
वे एक दूसरे के और यात्रा कर रहे हैं.
एक गठन के बाहर
अकेले जाने की कोशिश प्रतिरोध लगती है ...
गठन समूह में वापस हो जाता है
सामने वाला शक्ति का लाभ उठाने के लिए किसी भी हद तक गिर जाता है.
वो सत्यापित करता है ,चापलूसों को कलाकार होने का प्रमाणपत्र देता है,
मेरे प्रदेश की राजधानी मै सालो से ये चलन है ,
जो हाजिरी नहीं लगाते ....उन्हें वे "चूतिया" कहते है ,
सब के जीने की वजहे है , वे जीवित है "भय निर्मित करने के लिए ",
युवा कलाकारों मे, उन्हें हमेशा डर का अहसास कराते रहते ,
तुम हमारे बिना कुछ नहीं ,ताकि वे उनका गुट न छोड़ सके .......
वे सारे युवा एक दुसरे को पीठ फेरते ही "चूतिया" कहते बड़े होते है.....
हर किसी का अंह भाव इतना बड़ गया की
वह उसकी रक्षा के लिए दुसरो को नीचा दिखाने मे लगा है,
कई युवा कलाकार स्वैछिक दासता स्वीकार कर चुके है,बड़ी ख़ुशी से बड़ो के अधीन हो गए,
इससे समूह का भरण पोषण होता रहता...
यह हर राज्य मे होता है ......समूह हैं , गुट है ...
हर कलाकार एक दुसरे को गलियाता मिल जाता है.....
राग दरबारी की भाषा मे (श्री लाल शुक्ल )- यह गजन्हो की बस्ती है ...
अगर हम के रूप में,
एक के रूप में ज्यादा समझते है,
हम जो कर रहे हैं, क्या उसी तरह आगे बढ़ रहे हैं , चित्र के साथ
इस शाखा में वापस भनभनाहट और एक अन्य बिंदु ........... मक्खियों.
समझदार है: रोजगार की मांग कर रहे युवाओ को "नेशनल" या "किसी कलाकार के नाम का " पुरस्कार मिल जाता है .
पीछे से कुछ हार्न उन लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए ,
भविष्य के लिए अपनी गति बनाये रखो.
हम सुनते हैं,
जब पीछे से प्रेशर हार्न?...........कृपया दुरी बनाये रखे .
अंत में,
यह महत्वपूर्ण है, जब एक बीमार हो जाता है या आवाजो से घायल हो जाता है ,
निर्माण से बाहर हो जाता है,
दो अन्य कुछ एक के साथ बाहर आते हैं और इसे नीचे के पायदान मे उतरने को मदद करते है ,
सुरक्षा उधार दे. .....वे भयभीत है असुरक्षित है ......
वे साथ रहते जब तक की मक्खी मर जाती है.
भंन भनाहट....................
--RaajeshEknath
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